Thursday, January 19, 2012

न जाने मैं कहाँ आ गया

मीलों तक छाया सन्नाटा,
बस अँधेरे रौशन हैं यहाँ,
वीरान गलियों से गुजर कर,

न जाने मैं कहाँ आ गया !

खामोश वादियों के बीच,
ख़ामोशी के आलम में,
अपने ही साये से बोलता,
न जाने मैं कहाँ आ गया !

कुछ धूमिल खवाब संजोए,
कुछ धूमिल आशाएँ लेकर,
अनजाने सपनों को तलाशता,
न जाने मैं कहाँ आ गया !

निकला एक काफिला था,
मेरे कदम थम गये क्यूँ ,
काफिले से बिखर कर,
न जाने मैं कहाँ आ गया !

सदियों से अकेले,
एक मुसाफिर चल रहा है,
एक खोया राहगीर बनकर,
न जाने मैं कहाँ आ गया !

कुछ लम्हें फिसल रहे हैं,
मंजिलें हैं ओझल,
लम्हों को बटोरता,
न जाने मैं कहाँ आ गया !

मेरी मंजिल न जाने कहाँ है,
मेरी चाह न जाने क्या है,
एक कब्रिस्तान की ख़ामोशी में,
न जाने मैं कहाँ आ गया !

Rohit


-Image source:Google Images




17 comments:

Patali-The-Village said...

बहुत ही सटीक और भावपूर्ण रचना। धन्यवाद।

Patali-The-Village said...

बहुत ही सटीक और भावपूर्ण रचना। धन्यवाद।

vidya said...

theres a depth in this poem..
good writing...
nice to see ur blog.
best wishes.

ऋता शेखर मधु said...

बहुत ही सुंदर कविता...

sushma 'आहुति' said...

sahi pucha hai aapne khudh se.... ki jaane main kahan aa gaya..... bhaut acchi rachna abhivaykti..........

mridula pradhan said...

sunder likhe hain......

Sujatha Sathya said...

such meaning and depth in these lines. and the hindi just adds an extra touch to its enjoyment.

what's dhoomil? i dont know what it means :(

Binu Thomas said...

Awesome man!!! Your poem depicts the true feelings of any man alive on Earth!!

Mithlash said...

Superb! Awesome! and fabulous...Rohit yaar tumne tau kammal kar diya, kuch samay ke liye mujhe viraan kar diya:) Tumne Bahut accha likha...mere liye ye poem ek inspiration ka kaam karegi....Keep writing:)

shashi purwar said...

बहुत ही खूबसूरत रचना ....रोहित हर लाइन दिल में उतर गयी ....आखिरी बस दिल में समां गयी . सुंदर प्रस्तुति

दिगम्बर नासवा said...

ख्वाब संजोय रखें ... आशाएं जीवित रखें ... मंजिल मिल जायगी ... जहां भी होँ ...

Gayatri said...

A very touching poem. Pls write more.

Chintan Gupta said...

Rahit, bahut hi khoob!!

Ek badhia poem ki pehchaan, last line! I will remember this for a long time...

*tweeted your blog!

~ Chintan

amrendra "amar" said...

मनोभावों की सुन्दर अभिव्यक्ति.

Urmi said...

वाह! बहुत खूब लिखा है आपने! लाजवाब प्रस्तुती!

Mani said...

Nicely expressed...we all feel like this sometimes in life...

Quite realistic!

Mani

Shreya said...

Beautiful. I can relate myself to this post. Looks like we are in same boat.